Reviewing Old.

डर ..
कभी कभी सोचते हुए डर  लगता हैं
कभी कभी एक बाधा  भी सीमित करती लगती हैं
कभी कभी तारो को काट उड़ने  का मन करता हैं
कभी कभी ये ख्याल आता हैं
जानते हुए भी डर से डर लगता हैं
समझते हुए भी मन में शंका आती हैं
लेकिन एहसास हैं ये कही दिल के अंदर कुछ न होने से कुछ होनआ ही बेहतर हैं
कुछ गलत करके अनुभव के साथ
कुछ सही कर खुशी के साथ
कुछ कर दिख|ने कि चाहत
आज़ादी सोचने की
आज़ादी जीने की
ज़िन्दगी के दर को अनुभव करने की
डर के आगे जीत महसूस करने की
डर से भागने की नहीं डर के पास जाने की ॥
मैं पेड़ हूँ …
ऊपर हैं आसमान नीचे  हैं ज़मीन 
झूल रहा हूँ मैं यही अभी 
बात करते हैं लोग मुझसे कभी 
खेलते हैं मेरे संग कभी कभी 
रोते हैं हस्ते हैं रहते यहा 
ये धरती ही हैं हमारा आशियाँ 
ये धरती ही हैं हमारी पहचान 
ये धरती ही हैं हमारा आशियाँ || 
गीत 
झरने की कल कल चिड़िया की चह  चह 
गीत की बाहो में मचाए हैम हल चल 
शांति में छुपा शोर में हुआ  गीत का वर्णन हर स्तिथि में हुआ 
लोग गाते गए गीत बनते गए 
गीत कि कोई भाषा नहीं ये हैं एक अनोखी क्रिया 
गीत में भाव हैं , इसमें ख्वाब हैं 
दिल के पन्नो का हैं ये गवाँ ॥ 

शिक्षा का अधिकार..
जन्म का आधार नहीं 
 ये ज़िन्दगी बेकार नहीं 
क्रांति इसकी पहचान वही 
अधिकार की मांग,  इंसाफ नहीं । 

शिक्षा का अधिकार एक स्वप्न नहीं 
समाज की बाधाएं सीमित नहीं 
लड़का लड़की एक प्रश्न नहीं 
शिक्षा का अधिकार एक स्वप्न नहीं 

नई उम्मीद शिक्षा की,  नई किरण जगी हैं 
इस समाज में अब 
सब व्यक्ति अधिकार सहित हैं 
शिक्षा का अधिकार हर व्यक्ति का अधिकार 
एक नहीं हज़ारो का सपना साकार ,
एक नहीं हज़ारो का सपना साकार ॥ 
___________
Note to reader: The above poems were written when I was in grade 8th and 9th. And they remind me of I havent changed a bit.
Reviewing Old.
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